1 जब मैं छोटा था तो कितना अच्छा था
दादी की लोरी माँ की टिकोरी
दीदी का प्यार और भाभी का पकवान कितना अच्छा था
2 आंटी की डाट पापा की मार
दोस्तों की मस्ती मुकेश की मटरगस्ती
दादा जी ज्ञान और नया अंजाम कितना अच्छा था
3 मैडम की डाट स्कुल का मैदान
छोटो की लडकपन बडो की बडकपन
और मैदान की प्लेइंग टू नाँटी बाते कितना अच्छा था
मास्टर मुकेश
“जब मैं छोटा था, कितना अच्छा था,
दादी की लोरी, माँ का दुलार सच्चा था।
दीदी का प्यार, भाभी के पकवान,
हर एक पल में छुपा एक अरमान अच्छा था।
आंटी की डाँट, पापा की मार,
दोस्तों की मस्ती, मेरी मटरगस्ती बार-बार।
दादा जी का ज्ञान, नई-नई पहचान,
हर दिन लगता जैसे कोई नया जहान था।
मैडम की डाँट, स्कूल का मैदान,
छोटों का बचपन, बड़ों का अभिमान।
वो खेल, वो हँसी, वो नादानियाँ सारी,
काश लौट आए वो दिन, वो बचपन प्यारा सा संसार।”
