जीवन निकल रहा है, कुछ तो ख्याल कर, वक्त भी फिसल रहा है, यूं न मजाक कर। बेतहाशा, बेइंतहा यहाँ कुछ भी नहीं मिलता, बस ठहर! क्या चाहिए तुझे? ये खुद से सवाल कर। वक्त न तुझे कम मिला, न मुझे कतरा भर ज्यादा, क्या होगा कल, फिक्र में किया जीवन आधा। हाशिये पर हो…