केदार के बाल सन्यासी

केदार के बाल सन्यासी 1. पर्वत जैसे शुद्ध हृदय हैं, वादियों जैसा पावन मन, कृष्णा-आरव ने मिलकर किया, शिव चरणों में पावन अर्पण। नन्हे पग और राहें दुर्गम, पर चेहरे पर तेज अपार, चले देखने आदि योगी को, छोड़ जगत का झूठा प्यार। 2. आठ वर्ष के कृष्णा आगे, राह दि…

ऐ बादल, तू बैठ ना अभी

ऐ बादल, तू बैठ ना अभी 1. ऐ बादल, तू बैठ ना अभी, ज़रा मन की प्यास बुझाने दे। बरसों से सूखी इस धरती को, फिर सावन के गीत सुनाने दे। 2. तू आया है तो वादी में, एक ठंडी सी बहार आई है। इस तपते हुए सूने दिल को, मदहोश ज़रा हो जाने दे। 3. घिर आया है तू गगन मे…

वक्त का फलसफा

वक्त का फलसफा 1. यह बहर-ए-ज़माना का बहता दरिया है, हर पल अपनी रफ़्तार में है, कोई बैठा क़स्र-ए-शाही में मसरूर है, कोई ग़म के कारवाँ में है। जो कल तक खुद को शाह-ए-जहाँ समझ, इस जग में ब-अकड़ चलते थे, आज वही सिकंदर देखो, ख़ाक की इस …

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