वक्त का फलसफा 1. यह बहर-ए-ज़माना का बहता दरिया है, हर पल अपनी रफ़्तार में है, कोई बैठा क़स्र-ए-शाही में मसरूर है, कोई ग़म के कारवाँ में है। जो कल तक खुद को शाह-ए-जहाँ समझ, इस जग में ब-अकड़ चलते थे, आज वही सिकंदर देखो, ख़ाक की इस …
सपनों का संसार और जीवन की हकीकत 1. अँधेरी रातों में यादों के जुगनू टिमटिमाने लगे अब तो, दिल के सूने कोने में नए सुर गुनगुनाने लगे अब तो। हकीकत की ज़मीन पर जब भी कोई ज़ख़्म मिला, हम ख्वाबों की दुनिया में दिल बहलाने लगे अब तो। 2. जो कभी बंद आँखों का एक …
बेहतर की तलाश और चार दिन की ज़िंदगी 1. चार दिन की जिंदगी है, दो दिन बातों में निकल गए, जो कल तक अपने थे, वो बेहतर की तलाश में बदल गए। गुरूर किस बात का करें हम, इस मिट्टी के जिस्म पर, यहाँ बड़े-बड़े सिकंदर भी, आख़िर मिट्टी में मिल गए। 2. हम क्या थे और …
वही राम कहाते हैं 1. सांसों का पंछी उड़ रहा, तू कुछ तो इसका ख्याल कर, यह वक़्त हाथ से फिसल रहा, यूँ न इससे मज़ाक कर। बेतहाशा इस भीड़ में यहाँ, कुछ भी नहीं है मिलता, जो डूबकर भी हर बड़ी मुश्किल को हँसकर पाल लेते हैं। 2. वक़्त न तुझको कम मिला, न मुझे कतर…