केदार के बाल सन्यासी 1. पर्वत जैसे शुद्ध हृदय हैं, वादियों जैसा पावन मन, कृष्णा-आरव ने मिलकर किया, शिव चरणों में पावन अर्पण। नन्हे पग और राहें दुर्गम, पर चेहरे पर तेज अपार, चले देखने आदि योगी को, छोड़ जगत का झूठा प्यार। 2. आठ वर्ष के कृष्णा आगे, राह दि…