सपनों का संसार और जीवन की हकीकत



सपनों का संसार और जीवन की हकीकत

1.
अँधेरी रातों में यादों के जुगनू टिमटिमाने लगे अब तो,
दिल के सूने कोने में नए सुर गुनगुनाने लगे अब तो।
हकीकत की ज़मीन पर जब भी कोई ज़ख्म मिला,
हम ख्वाबों की दुनिया में दिल बहलाने लगे अब तो।
2.
जो कभी बंद आँखों का एक मीठा सा ख्वाब था,
वो आज मेरी हर धड़कन का मुकम्मल जवाब था।
हकीकत की जलती धूप में जब भी मिला अंधेरा,
तेरा पावन साया ही मेरे लिए चमकता आफ़ताब था।
3.
दुनिया जिसे हकीकत कहती है, वो बस एक मेला है,
यहाँ भीड़ में भी हर मुसाफ़िर बिल्कुल अकेला है।
सपनों के उस पार जो एक हँसती हुई दुनिया है,
उसी दुनिया की चाहत में इस दिल ने सब झेला है।
4.
खुली आँखों से जो देखा, वो अक्सर अधूरा निकला,
जिसे सच माना था हमने, वो काँच का टुकड़ा निकला।
पर बंद आँखों के उस पावन और शांत समंदर में,
हर एक जज्बात मेरा, सोने से भी खरा निकला।
5.
लोग कहते हैं कि ख्वाबों की कोई उम्र नहीं होती,
मगर सच तो ये है कि इनके बिना कोई सहर नहीं होती।
जो थक कर सो जाता है उम्मीद की बाहों में,
उसे फिर इस जालिम ज़माने की कोई फिक्र नहीं होती।
6.
कुछ यादें ऐसी हैं जो रातों की नींद चुराती हैं,
दबे पाँव आकर ज़ेहन में पुराना शोर मचाती हैं।
पर उन्हीं यादों के साए में जब कोई गीत बनता है,
तो दर्द की वो सूखी ज़मीन भी फिर से मुस्कुराती है।
7.
अब न शिकवा है किसी से, न कोई अधूरी आस है,
जो मेरे अंदर बरसता है, वही सबसे खास है।
गैरों की महफ़िल से तो कब के दूर हो गए हम,
अब तो बस खुद से खुद की मुलाक़ात का अहसास है।
8.
ये जीवन एक शातिर है, जहाँ हर रोज़ नया मोड़ है,
कहाँ जाना है किसे, यहाँ बस इसी बात की होड़ है।
जब तक ये सांसें जारी हैं, हर पल को तू खुलकर जी,
मिट्टी का पुतला है तू, यहाँ सिकंदर का भी घमंड चूर है।
9.
सपनों के महल तो हम रोज़ बड़े चाव से सजाते हैं,
पर हकीकत की एक ही ठोकर से वो पल में ढह जाते हैं।
ख्वाबों में जो अपने बनकर गले से लगाते हैं यहाँ,
सुबह आँख खुलते ही वो अजनबी चेहरे नज़र आते हैं।
10.
खुली आँखों का यह संसार महज़ एक हसीन छलावा है,
जहाँ हर हँसते हुए चेहरे के पीछे छिपा एक नया दिखावा है।
ख्वाब तो मासूम हैं जो बिना किसी शर्त के आते हैं,
पर इस हकीकत की नगरी में तो हर कदम पर सौदा और बुलावा है।
11.
चाँद-तारों को छूने की हसरत दिल में ही मचलती रही,
और हकीकत की जलती धूप में हमारी ये उम्र ढलती रही।
सपनों के हसीन साए ने ही थाम कर रखा इस सीधे दिल को,
वरना इस ज़माने की कड़वाहट तो हमें रोज़ ही छलती रही।
12.
अब छोड़ इन दोनों की कशमकश, तू खुद से खुद का नाता जोड़,
सपनों की उड़ती पतंग को अब तू हकीकत की ज़मीन पर मोड़।
कागज़ की इस शांत छाँव में ही छुपा जीवन का असली सुकूँ,
कलम उठा और इस मतलबी दुनिया का हर एक भरम तू तोड़।

📖 कविता में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):

  • मुकम्मल = पूरा / संपूर्ण
  • आफ़ताब = सूरज / सूर्य
  • सहर = सुबह / भोर
  • ज़ेहन = दिमाग / मन
  • शिकवा = शिकायत / गिला
  • शातिर = चालाक / चतुर
  • छलावा = धोखा / भ्रम
  • हसरत = अधूरी इच्छा / कामना
  • कशमकश = उलझन / दुविधा
  • भरम = वहम / झूठा दिखावा


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने