चंदा आया


चंदा आया
1. चंदा आया, चंदा आया,
और तारों का बारात लाया।
कभी बड़ा, कभी छोटा,
कभी शर्माए से पड़ा,
स्वच्छ मन सा किरण उसकी,
जैसे हाथों को फैलाया।
2. चंदा आया, चंदा आया,
अपने साथ उजियारा लाया।
शीतल मंद श्यामल जैसी,
एक पाख पूरा तीन जैसी,
सब बच्चों का प्यारा मामा,
ढेर सारा खिलौना लाया।
3. चंदा आया, चंदा आया,
उसको अपना मामा भाया।
नानी से फिर पापड़ खाया,
इसलिए आज देर से आया।
उसको ढेर काम है आज,
इस बात को पापा ने बताया।
4. चंदा आया, चंदा आया,
उसने आज खाना खाया।
इस बात को मम्मी ने बताया,
चंदा उसी का प्यारा मामा।
जिसने पूरा भोजन खाया,
इशी ने फिर खाना खाया।
काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
  • बारात = उत्सव का समूह / जुलूस
  • शर्माए से = लजाते हुए / बादलों में छिपते हुए
  • स्वच्छ = साफ़ / पवित्र
  • उजियारा = प्रकाश / रोशनी
  • शीतल = ठंडा / सुकूँ देने वाला
  • पाख = पक्ष / पखवाड़ा (पंद्रह दिन का समय)

📜 इस कविता का सरल भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस बाल-कविता के माध्यम से कवि ने बच्चों के प्रिय 'चंदा मामा' और उनके प्रति बचपन के निश्छल कौतूहल व कल्पनाओं को बहुत ही सुंदर शब्दों में पिरोया है। रात के आकाश में जब चंदा मामा अपनी चाँदनी बिखेरते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे अपने साथ चमचमाते तारों की पूरी बारात लेकर आए हैं। चंदा का कभी घटता तो कभी बढ़ता हुआ आकार और बादलों की ओट में 'कभी शर्माए से' छिप जाना बच्चों के मन में एक गहरा आश्चर्य पैदा करता है, और उसकी शीतल किरणें एक पावन और स्वच्छ मन का अहसास कराती हैं। बचपन की उन मीठी कहानियों को याद करते हुए कवि कहते हैं कि चंदा मामा रात को देर से इसलिए आते हैं क्योंकि वे नानी के घर रुककर पापड़ खाते हैं और उनके पास रात में पूरी दुनिया को रोशन करने का बहुत सारा काम होता है। जब इशी चंदा मामा को पूरा भोजन करते देखती है, तो वह भी खुश होकर अपना खाना खा लेती है। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि आधुनिक युग की मशीनी दौड़ से दूर, हमें बच्चों के भीतर की इस मासूम कल्पनाशीलता और प्रकृति के साथ उनके इस पावन व सादे जुड़ाव को हमेशा ज़िंदा रखना चाहिए 


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने