बेमिशाल नेता जी



नेता जी हमसे  मिलने आये चुनाव के प्रचार में 

एक बार भी नही देखा हमने तब से गाँव के बाजार  में 

क्या बड़े -बड़े वादे बड़े -बड़े कस्मे निभा न सके वो अपनी रस्मे 

भूल गये वो हमको और उनको बिजी है अपने काम में 

कोई समस्या हो तो कहते है कि हल कर देगे कल परसों के शाम में 

लोग डरते है मिलने से उनसे डाले थे वोट औरो के नाम में 

बातो ही बातो में मै इतना कुछ कह दिया  नेता जी के गांव में 

फिर भी नेता जी ने मंच पर मुझे पैसा दिया इनाम में 

जब चुनाँव फिर आई  तो नेता जी को हम याद आये  अपने गाँव में 



                                                                                                 मास्टर मुकेश 


“नेता जी हमसे मिलने आए चुनाव के प्रचार में,

फिर कभी न दिखे वो गाँव के बाज़ार में।

बड़े-बड़े वादे, बड़ी-बड़ी कसमें खाई थीं,

निभा न सके वो अपनी ही बातों के व्यवहार में।


कोई समस्या हो तो कहते—‘कल देखेंगे’,

लोग डरते हैं अब उनसे मिलने के विचार में।

डाले थे वोट हमने जिनके नाम पर,

वो निकले किसी और ही सरकार में।


बातों ही बातों में मैं सच कह गया,

नेता जी के ही अपने गाँव के दरबार में।

फिर भी मुस्कुरा कर उन्होंने इनाम दे दिया,

शायद सच्चाई भी बिकती है अब संसार में।”

1 टिप्पणियाँ

और नया पुराने