इतिहास दोहरा लो भाई


इतिहास दोहराता लो भाई
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें
1. कुछ किये राजे महाराजा और किये वीर क्रांतिकारी,
सात सौ बारह से लेकर अब तक हम कुछ न किये निगरानी।
भूल हुयी कुछ उनसे भूल हुयी कुछ हमसे,
अब भी इतिहास दोहराता भाई फिर से ना हम फिसलें।
गुज़र चुके जो लम्हे सर्द सितम के उनको याद करो,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
2. पृथ्वी ने ली बहुत लड़ाई जयचंद के कारण सफलता न पाई,
उसकी तुम बात करो ना पृथ्वीराज को अपनों ने खाई।
आख़िरकार गोरी ने उसको मौत की सज़ा सुनाई,
आँधी अभी थमी नहीं की बवंडर चलने लगी।
जो ज़ुल्म सहे हमारे पूर्वजों ने उनके ज़ख्मों को याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें。
3. रामचंद्र ने ली बहुत लड़ाई जलाउद्दीन के कारण सफलता न पाई,
जयचंद के बाद भीम को भी अपनों की बात समझ न आई।
इसने अपनी भड़की हुयी ज्वाला को सुलगाई,
मिलकर अलाउद्दीन के साथ एक सफल योजना बनाई।
देश को यो बर्बाद किये उनके षड्यंत्रों को याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
4. सोलहवीं शताब्दी में राणा सांगा ने देश में आग जगाई,
इतने अपने अच्छे मित्र बाबर की गुहार लगाई。
आधे अधूरे सफल नहीं हुए लेकिन बाबर ने विजय पाई,
इस नये देवता के आगे हिंदुओं ने शीश नवाई।
पूरण सब झूठे ही सही लेकिन इतिहास को याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
5. हम इतने अच्छे हैं की हमारी तरक्की ब्रिटिश सरकार को भाई,
कुछ राजाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी कर लिए बनवाई।
मिली जो जगह पैर रखने की अंग्रेजों ने सोने की ललक बढ़ाई,
फिर धीरे धीरे फूट डालो और राज करो इस देश में नई नीति अपनाई।
लेगे वो अत्याचार पाप शोषण करने उनकी नादानी याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
6. २०वीं सदी में संत बापू का सत्य अहिंसा देश के कोने कोने में चलने लगा,
सारे लोग एकत्र होने लगे विदेशी होली जलने लगा।
अंग्रेज़ जब घबराने लगे अमृतसर में गोली चलने लगा,
बटुकेश्वर को यह सहन न हो पाई उसने बम से असेम्बली उड़ाई।
दिनकर जी अछूते न रहे बटुक पर दो सौ लाइन की कविता लिख डाले,
ज़रा उनकी बहादुरी को याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
7. फांसी क्या वरनला हुयी भगत को यही अभिलाषा हुयी,
सोचो ये कैसी लगन खुदीराम बोस ने चाहा अमन।
चंद्रशेखर ने लगाई आवाज़ अंग्रेज़ों के ना आयेंगे हाथ,
पांच गोली से देश बचाये एक से स्वयं अपने को सजाये।
वाह रे देश राजकुमार धन्य हुयी भारत उनकी जवानी को याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
8. नरम और गरम दल जलने लगे अंग्रेज़ अब पिघलने लगे,
तोर नहीं अब मोर बारी कहने लगे अब सब बारी-बारी।
दाढ़ी यात्रा ने अंग्रेजों को हिला दिया,
लाजपत को मारकर अंग्रेजों ने पूरे भारत को रुला दिया।
किये करदानी कैसे लिखे वो अपनी कहानी ज़रा याद करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
9. त्राहि-त्राहि मच गया जन संग्राम छिड़ गया,
वीरों की खेती होने लगी सीना पर गोली चलने लगी।
कही घूम-घूम कहीं धड़ाम-धड़ाम गलियों से आवाज़ आने लगी,
मरेंगे या मारेंगे वीर हौसला अब बांधने लगे।
जय हिंद का नारा उजियार करे बाकी सबको बेकार करे,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
10. सुभाष का सैलाब उमड़ने लगा यह धरती भी अब जलने लगा,
एक तरफ बापू पुजारी एक तरफ सुभाष क्रांतिकारी।
हे राम, तुम मुझे खून दो, भारत छोड़ो जैसे नारा अब गूंजने लगा,
जय हिंद वन्दे मातरम का ठहाका अब लगने लगा।
अंधकार अब छंटने लगा ज़रा उन वीरों को प्रणाम करो,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
11. एक नई लहर एक नई किरन नये उम्मीद के गीत,
है प्रकाशमान धरती अब कैसी सबकी रीत।
शादियों के बाद स्वतंत्र हुए हम अब हमें ना कोई गम,
अब छोड़ दे यह नादानी ना करे हम फिर से मनमानी।
उन वीरों की यह अमानत संभाल कर हम रखें,
उन वीरों को याद करें देश में एक अच्छा काम करें,
आओ मिलकर विचार करें देश में एक अच्छा काम करें।
७१२ से लेकर अब तक का इतिहास

काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
  • निगरानी = देखरेख / सचेत रहना / सावधानी
  • सितम = अत्याचार / ज़ुल्म
  • षड्यंत्र = साज़िश / धोखा
  • गुहार = पुकार / मदद के लिए बुलाना
  • अभिलाषा = तीव्र इच्छा / चाहत
  • जन संग्राम = जनता का महा-आंदोलन / क्रांति
  • अमानत = धरोहर / सुरक्षित रखी वस्तु

📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत विशाल, ओजस्वी और ऐतिहासिक महा-कविता के माध्यम से कवि ने सन ७१२ ईस्वी में हुए विदेशी आक्रमणों से लेकर भारत की आज़ादी तक के पूरे इतिहास को एक धागे में पिरोया है। कवि देश के नागरिकों का आह्वान करते हुए कहते हैं कि आओ, हम सब मिलकर अपने देश के अतीत पर गहराई से विचार करें ताकि वर्तमान में कोई बड़ी भूल न हो। हमारे इतिहास का सबसे कड़वा सच यही रहा है कि जब-जब हमारे देश पर विदेशी ताकतों ने ज़ुल्म ढाए, तब-तब उसका मुख्य कारण अपनों की गद्दारी और आपसी फूट थी। पृथ्वीराज चौहान की वीरता को जयचंद के विश्वासघात ने कमज़ोर किया, जिसके कारण मोहम्मद गोरी ने देश पर क्रूर शासन स्थापित किया। इसी तरह अलाउद्दीन खिलजी के कूटनीतिक षड्यंत्रों और अपनों की नादानी के कारण हमारे देश की महान रियासतें बर्बाद हुईं। सोलहवीं शताब्दी में मुग़ल शासक बाबर का भारत में आना और राजाओं की आपसी फूट के कारण उसका विजय पाना भी इतिहास का एक बड़ा सबक है।
कवि आगे बताते हैं कि व्यापार के बहाने आई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने हमारे कुछ लालची राजाओं की कमजोरी का फायदा उठाकर 'फूट डालो और राज करो' की दमनकारी नीति अपनाई। उन्होंने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश को लूटा और जनता पर घोर अत्याचार किए। २०वीं सदी में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का पावन आंदोलन शुरू किया, तो समूचा देश एकजुट हो गया और विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। जब अंग्रेज़ों का ज़ुल्म अपनी सीमा पार कर गया और जलियांवाला बाग जैसी दर्दनाक घटनाएँ हुईं, तो महान क्रांतिकारी भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त, चंद्रशेखर आज़ाद और खुदीराम बोस जैसी वीर सपूतों ने हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लिया। आज़ाद ने अंतिम सांस तक अंग्रेज़ों के हाथ न आने की प्रतिज्ञा पूरी की। दूसरी तरफ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज के फौलादी संकल्प और 'तुम मुझे खून दो' के गगनभेदी नारे ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
शताब्दियों के लंबे संघर्ष, जन संग्राम और अनगिनत बलिदानों के बाद आज हमारा देश पूरी तरह स्वतंत्र है। कवि अंत में जीवन के यथार्थ पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि गृहस्थी की ज़िम्मेदारियों और 'शादियों के बाद' ही मनुष्य सही मायनों में जीवन की असली आज़ादी और परिपक्वता को समझ पाता है। इस गौरवशाली इतिहास का मुख्य संदेश यही है कि आज की युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के दिए गए बलिदानों का मूल्य समझना होगा। यह आज़ादी वीर शहीदों की एक पावन अमानत (धरोहर) है। हमें अतीत की नादानियों और आपसी फूट से सीख लेकर देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को हमेशा संभाल कर रखना होगा, ताकि हमारा देश फिर कभी किसी कूटनीति का शिकार न बने और प्रगति के पथ पर सीना तानकर हमेशा बुलंद रहे 

 

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