कर्मवीर बनो


कर्मवीर बनो
1. धर्मराज हैं हम वीर भी बने रहे,
हौसला है मान का, घमंड पर्वत सा रहे।
असर अभी जो दिख रही प्रभाव बस तनी रहे,
मुबारक हो ये शाम आगाज़ जिंदगी रहे।
2. हर मुश्किल आसान होगी ज़िद बस बनी रहे,
नादान ना हम बनें बस दिल को आवाज़ करें।
लफ्ज़ जो ज़ुबां तनी उसी को बस सम्भाल दे,
आसमान सी झलक रग में बस बिठा ले।
3. भाग्य के भरोसे बैठना कायरों की रीत है,
मेहनत की स्याही से जो लिखे वही जीत है।
हाथ की लकीरों को पुरुषार्थ से बदल दे,
कर्म के मैदान में तू सीना तान चल दे।
4. तस्वीर जो बनी जिगर में उसी को बस उतार ले,
धरणी जो खुदा की हो उसी को बस निहार ले।
दुःखी हम नहीं हो बस मन से यह निकाल दे,
राम नानक कबीर हो तुम, बस अपने को सँवार ले।
5. ज़ुल्म के अंधेरे से टकराना ही पड़ेगा,
हक की लड़ाई में अब आगे आना ही पड़ेगा।
कायरों की भीड़ में तू अपनी साख बना ले,
ज़िन्दगी के खेल को तू खुद ही मुकम्मल बना ले।
6. अकेले तुम नहीं हो बस ज़रा तू ध्यान दे,
आग जो दबी सभी की उसी को बस उधार दे।
आओ हम सब मिलकर देश को नयी पहचान दें,
अधर्म को छोड़ कर सिर्फ व सिर्फ परम सत्य को ही पनाह दें।
7. तू ठहर नहीं तू थप नहीं राहें बुला रही हैं,
मंज़िलें पुकार कर तेरा मान बढ़ा रही हैं।
कर्मवीर बन के तू इतिहास नया रच डाले,
भारत माँ के आँचल में तू खुशियों के दीप जला दे।

काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
  • धरणी = पृथ्वी / भूमि / धरती माता
  • आगाज़ = शुरुआत / जीवन का नया आरंभ
  • लफ्ज़ = शब्द / ज़ुबां से निकलने वाले बोल
  • जिगर = हृदय / दिल / अंतर्मन
  • निहार ले = प्रेम से देखना / निहारना
  • पनाह = शरण देना / आश्रय देना / अपनाना
  • पुरुषार्थ = कड़ा परिश्रम / मेहनत / कर्मशीलता
  • साख = इज़्ज़त / सम्मान / प्रतिष्ठा
  • मुकम्मल = पूरा / संपूर्ण / मुकम्मल रूप

📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत भव्य, ओजस्वी और नैतिक मूल्यों से ओत-प्रोत महा-कविता के माध्यम से कवि ने समाज के हर व्यक्ति को अपने भीतर के 'कर्मवीर' को जगाने, भाग्य भरोसे बैठने की आदत को छोड़ने और जीवन के सत्य मार्ग पर अडिग रहने का एक महान संदेश दिया है। कवि कहते हैं कि हम उसी पावन संस्कृति के संवाहक हैं जहाँ धर्मराज युधिष्ठिर जैसे नीतिवान और महावीर योद्धा पैदा हुए हैं। हमें अपने आत्मसम्मान का हौसला इतना मज़बूत रखना चाहिए कि हमारा सिर पर्वत की तरह हमेशा ऊँचा रहे और हमारा सकारात्मक प्रभाव समाज पर हमेशा बना रहे। जीवन की हर शाम को एक नई शुरुआत (आगाज़) मानकर उत्साह से जीना चाहिए। यदि हमारे भीतर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की एक कड़क ज़िद और दृढ़ इच्छाशक्ति बनी रहे, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी मुश्किल भी बहुत आसान हो जाती है। हमें नादानी का मार्ग छोड़कर हमेशा अपने अंतर्मन (दिल) की पवित्र आवाज़ को सुनना चाहिए। अपनी ज़ुबां से निकलने वाले एक-एक शब्द (लफ्ज़) को बहुत संभालकर बोलना चाहिए और रगों में आसमान जैसी विशाल सोच को बिठाना चाहिए।
कवि कायरता पर करारी चोट करते हुए कहते हैं कि भाग्य या किस्मत के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाना केवल कमज़ोर लोगों की पहचान होती है। जो इंसान अपनी मेहनत की अटूट स्याही से नया इतिहास लिखता है, असली जीत केवल उसी के कदमों में आती है। हमें अपने हाथ की लकीरों को कोसने के बजाय अपने कड़े परिश्रम (पुरुषार्थ) से अपनी तक़दीर को खुद बदलने का मादा रखना होगा। जो सुंदर सपने और तस्वीरें तुम्हारे हृदय (जिगर) में बनी हैं, उन्हें मेहनत के दम पर हकीकत के धरातल पर उतार लो। यह सुंदर धरती (धरणी) ईश्वर की ही बनाई हुई एक अनूठी कलाकृति है, जिसे प्रेम से निहारना और सुरक्षित रखना हमारा परम कर्तव्य है। अपने मन से इस संशय और निराशा को पूरी तरह निकाल दो कि तुम दुखी या कमज़ोर हो। याद रखो, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, गुरु नानक और संत कबीर जैसे महान युगपुरुषों का अंश तुम्हारे भीतर ही छिपा है, बस अपनी आंतरिक कमियों को दूर करके खुद को सँवारने की ज़रूरत है। समाज में फैले ज़ुल्म, भ्रष्टाचार और अन्याय के अंधेरे से डरे बिना हमें अपने हक की लड़ाई में सीना तानकर आगे आना ही पड़ेगा, ताकि हम इस भीड़ में अपनी एक साफ़ इज़्ज़त (साख) और पहचान बना सकें।
इस संघर्ष के रास्ते पर तुम खुद को कभी अकेला मत समझो; समाज के हर पीड़ित व्यक्ति के सीने में जो न्याय की दबी हुई आग है, उसे अपनी सादगी और हौसले से एक नई दिशा दो। अब ठहरने या थकने का समय पूरी तरह समाप्त हो चुका है; जीवन की कठिन राहें और सफलता की मंज़िलें तुम्हें पुकार रही हैं। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि समाज और देश को एक नई पहचान दिलाने के लिए हम सबको एकजुट होना होगा। अधर्म, पाखंड, आलस्य और कूटनीति के रास्तों को पूरी तरह त्याग कर केवल और केवल 'परम सत्य' तथा मानवता के पावन मार्ग को गले लगाना ही जीवन की असली सार्थकता है। एक सच्चा कर्मवीर बनकर ही हम भारत माँ के आँचल में खुशियों के सुंदर दीप जला सकते हैं और अपने जीवन को सफल बना सकते हैं 


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