कविता कहती है
1. क्यों खामोशी को छुपाए बैठे हो मासूम दिल को उदास बनाये बैठे हो,
मुझे देखो मैं आंसू ही सही खुशी या ग़म का तुम अनुमान लगाये बैठे हो।
क्या हूँ मैं मुझे खुद नहीं पता लेकिन लगता है एक सागर समाये बैठा हूँ,
मुझे बस तरसकर देखो सच में एक मनोहर रूप सजाये बैठा हूँ।
मुझे देखो मैं आंसू ही सही खुशी या ग़म का तुम अनुमान लगाये बैठे हो।
क्या हूँ मैं मुझे खुद नहीं पता लेकिन लगता है एक सागर समाये बैठा हूँ,
मुझे बस तरसकर देखो सच में एक मनोहर रूप सजाये बैठा हूँ।
2. नदियों का किनारा हूँ आकाश का टूटा हुआ तारा हूँ,
धड़कता तो नहीं मेरा दिल लेकिन मैं कई धड़कनों का सहारा हूँ।
तृष्णा तो नहीं मेरे पास लेकिन मैं प्यास बुझाता हूँ,
तन्हा में जीने वालों का ओझल ही सही लेकिन गुज़रा हूँ।
धड़कता तो नहीं मेरा दिल लेकिन मैं कई धड़कनों का सहारा हूँ।
तृष्णा तो नहीं मेरे पास लेकिन मैं प्यास बुझाता हूँ,
तन्हा में जीने वालों का ओझल ही सही लेकिन गुज़रा हूँ।
3. अभिव्यक्ति मुझे जैसे कर दो वैसे मैं दिख जाऊंगा,
फिर भी भूल से यह मत समझना की मैं घायल हो जाऊंगा।
अपनी राह तलाशने वाला राही न सही लेकिन बंजारा हूँ,
गली-गली में हवाओं की भांति घूमने वाला आवारा हूँ।
फिर भी भूल से यह मत समझना की मैं घायल हो जाऊंगा।
अपनी राह तलाशने वाला राही न सही लेकिन बंजारा हूँ,
गली-गली में हवाओं की भांति घूमने वाला आवारा हूँ।
4. तुम मुझे मर हुआ ना समझो मैं एक जीवंत आत्मा हूँ,
शादियों से ही इस धरती को मैं ही सींचा रहा हूँ।
थोड़ी देर तुम चल कर यूँ थककर रुक गये,
मुझे देखो मैं हर ज़र्रे को अपनी मंज़िल बनाया हूँ।
शादियों से ही इस धरती को मैं ही सींचा रहा हूँ।
थोड़ी देर तुम चल कर यूँ थककर रुक गये,
मुझे देखो मैं हर ज़र्रे को अपनी मंज़िल बनाया हूँ।
5. मुझको सबसे ज़्यादा एक कवि ही जानता है,
न जाने किन-किन भाव से मुझे पहचानता है।
देखो मुझे सच में मैं अपने आप में प्रेम का परिभाषा हूँ,
स्तुति या नमन का उच्चारण हूँ मैं ही सामवेद का गायन हूँ।
न जाने किन-किन भाव से मुझे पहचानता है।
देखो मुझे सच में मैं अपने आप में प्रेम का परिभाषा हूँ,
स्तुति या नमन का उच्चारण हूँ मैं ही सामवेद का गायन हूँ।
काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
- अनुमान = अंदाज़ा / कयास लगाना
- मनोहर = मन को मोहने वाला / सुंदर / प्यारा
- तृष्णा = तीव्र इच्छा / लालसा / प्यास
- ओझल = आँखों से दूर होना / छिप जाना
- अभिव्यक्ति = प्रकट करना / विचारों को रूप देना
- ज़र्रे = कण-कण / मिट्टी का छोटा हिस्सा
- स्तुति = ईश्वर की प्रार्थना / आराधना / वंदना
📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत दार्शनिक, ओजस्वी और साहित्यिक गहराई से परिपूर्ण कविता के माध्यम से कवि ने 'कविता' के वास्तविक स्वरूप, उसकी अमरता और मानव मन पर पड़ने वाले उसके रूहानी प्रभाव को एक जीवित चेतना के रूप में प्रस्तुत किया है। कविता स्वयं मनुष्य से संवाद करते हुए कहती है कि हे मानव, तू अपने भीतर इस कड़वी खामोशी को क्यों छुपाए बैठा है और अपने इस मासूम दिल को बेवजह उदास क्यों बना रखा है? मुझे ध्यान से देखो; मैं आँखों से बहने वाला महज़ पानी (आंसू) नहीं हूँ, बल्कि मैं इंसान के भीतर सुलगने वाले हर खुशी और ग़म का साक्षात् प्रमाण हूँ, जिसका तुम बाहर बैठकर केवल अंदाज़ा (अनुमान) लगा रहे हो। मेरा वास्तविक अस्तित्व क्या है, यह मुझे खुद भी पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन मेरे भीतर मानवीय भावनाओं का एक पूरा असीम समंदर समाया हुआ है। जो भी व्यक्ति मुझे प्रेम और करुणा के भाव से तरसकर देखता है, उसे मेरे भीतर साहित्य का एक अत्यंत सुंदर और मनमोहक (मनोहर) रूप दिखाई देता है।
इस अत्यंत दार्शनिक, ओजस्वी और साहित्यिक गहराई से परिपूर्ण कविता के माध्यम से कवि ने 'कविता' के वास्तविक स्वरूप, उसकी अमरता और मानव मन पर पड़ने वाले उसके रूहानी प्रभाव को एक जीवित चेतना के रूप में प्रस्तुत किया है। कविता स्वयं मनुष्य से संवाद करते हुए कहती है कि हे मानव, तू अपने भीतर इस कड़वी खामोशी को क्यों छुपाए बैठा है और अपने इस मासूम दिल को बेवजह उदास क्यों बना रखा है? मुझे ध्यान से देखो; मैं आँखों से बहने वाला महज़ पानी (आंसू) नहीं हूँ, बल्कि मैं इंसान के भीतर सुलगने वाले हर खुशी और ग़म का साक्षात् प्रमाण हूँ, जिसका तुम बाहर बैठकर केवल अंदाज़ा (अनुमान) लगा रहे हो। मेरा वास्तविक अस्तित्व क्या है, यह मुझे खुद भी पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन मेरे भीतर मानवीय भावनाओं का एक पूरा असीम समंदर समाया हुआ है। जो भी व्यक्ति मुझे प्रेम और करुणा के भाव से तरसकर देखता है, उसे मेरे भीतर साहित्य का एक अत्यंत सुंदर और मनमोहक (मनोहर) रूप दिखाई देता है।
कविता अपनी व्यापकता को उघाड़ते हुए कहती है कि मैं बहती हुई नदियों का वह शांत किनारा हूँ जहाँ लोग सुकूँ तलाशते हैं, और मैं आकाश का वह टूटा हुआ तारा हूँ जो टूटकर भी दूसरों की मन्नतें पूरी करता है। भौतिक रूप से भले ही मेरा अपना कोई दिल नहीं धड़कता, लेकिन इस संसार के लाखों-करोड़ों धड़कते हुए दिलों का असली सहारा और उनकी आवाज़ केवल मैं ही हूँ। मेरे भीतर भौतिक चीज़ों को पाने की कोई लालसा या तीव्र इच्छा (तृष्णा) नहीं है, इसके बावजूद मैं अपने शब्दों के शीतल जल से तड़पते हुए मन की वैचारिक प्यास को बुझा देती हूँ। एकांत और अकेलेपन (तन्हा) में जीने वाले मायूस लोगों के जीवन से मैं भले ही सीधे तौर पर ओझल रहूँ, लेकिन उनकी स्मृतियों के रास्ते से गुज़रने वाली सच्ची सहचरी मैं ही हूँ। मनुष्य अपनी सोच और विचारों के माध्यम से मुझे जैसा रूप (अभिव्यक्ति) देता है, मैं वैसी ही बनकर कागज़ के पन्नों पर सज जाती हूँ। अगर कोई आलोचक या कूटनीति की चाल मुझे दबाना चाहे, तो भी मैं कभी ज़ख्मी या घायल नहीं हो सकती क्योंकि विचार अमर होते हैं। मैं किसी एक बंधी-बंधाई लीक पर चलने वाली राही नहीं हूँ, बल्कि अपनी राह खुद तलाशने वाली एक आज़ाद बंजारा हूँ, जो स्वच्छंद हवाओं की भाँति समाज की गली-गली में घूमकर चेतना बिखेरती है।
कवि समाज को एक महान चेतावनी देते हुए कविता के माध्यम से कहते हैं कि तुम मुझे मरा हुआ या कोई निर्जीव शब्द समझने की भूल कभी मत करना; मैं शब्दों के भीतर वास करने वाली एक साक्षात् जीवंत आत्मा हूँ। सदियों और 'शादियों से' जब से मानव सभ्यता ने सांस ली है, तब से इस धरती के वैचारिक धरातल को अपने ज्ञान से सींचने का पावन कार्य केवल मैंने ही किया है। आज का मनुष्य जीवन के इस कठिन संघर्ष पथ पर थोड़ी ही दूर चलकर थक जाता है और हार मानकर रुक जाता है; लेकिन मुझे देखो, मैंने तो इस कायनात के हर एक छोटे से छोटे कण (ज़र्रे) को संघर्ष के दम पर अपनी मंज़िल बना लिया है। इस संसार में मेरे वास्तविक स्वरूप को सबसे गहराई से केवल एक सच्चा 'कवि' ही जान और समझ सकता है, जो अपनी निश्छल साधना से न जाने कितने अनूठे भावों में मेरी पहचान करता है। मैं खुद अपने आप में निश्छल प्रेम की साफ़ और मुकम्मल परिभाषा हूँ। ईश्वर की पावन प्रार्थना (स्तुति), वंदना और नमन का पवित्र उच्चारण भी मैं ही हूँ, और अध्यात्म के शिखर पर गूँजने वाला सामवेद का पावन गायन भी मेरी ही रूह है। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना, शाश्वत सत्य और ईश्वर की आराधना का सबसे सादा और जीवंत माध्यम है जो समाज को हमेशा जागृत रखता है