सफलता से एक कदम दूर हम


सफलता से एक कदम दूर हम
1. ये मुश्किलें न होतीं तो ये इरादे न होते,
जो साथ लेकर चलते तो ये कायदे भी न होते।
तू उड़ और निकल जा जिधर तुम्हें जाना है,
क्योंकि इस दरिया को पार न करना होता तो,
किसी ने ये काठ के नौके गढ़ाए न होते।
2. इन कांटों पर चलना सीख ले तो बाकी क्या रह जाये,
बेफ़िक्र सब मर्ज़ की दवा मिल जाये।
पार बहुतों ने किया ये आग की दरिया,
कोई एक हो तो बताये ऐसे हम कितने को गिनाये।
3. नींव हमारी मज़बूत है क्योंकि हमने एक प्यास है,
अमन का पाठ हमने पढ़ाया इसलिए हम विख्यात हैं।
तू नज़र उठा कर ज़रा होश में देख चारों तरफ,
जिसने भी जो चाहा उसको सच में प्राप्त है।
4. निकल चल तू कर गुज़र चल तू,
उस सितारों के पार चल तू।
अपनी आरज़ू को इतना बड़ा कर ले की उसमें समुंदर भी समा जाये,
गर्दिश ही पर मिलेगा ज़रूर बस अपने आप पर एक नज़र कर ले तू।
5. एक ज़ंजीर की मज़बूत उसकी एक कमज़ोर कड़ी है,
देखो ज़रा तुम गौर से मंज़िल भी बेताब खड़ी है।
एक कोरे कागज़ और एक कलम से,
सुनहरे अक्षरों में इतिहास लिखने को समय भी खड़ी है।
6. डर-डर कर जियोगे तो मौत मर जाओगे,
सत्साहस के साथ संघर्ष करोगे सफल हो जाओगे।
व्यर्थ सोचने से अपने को कोसने से कुछ नहीं मिलेगा,
जिस दिन से शुरुआत करोगे सफलता एक कदम दूर पाओगे।

काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
  • कायदे = नियम / सिद्धांत / तौर-तरीके
  • काठ = लकड़ी
  • मर्ज़ = बीमारी / तक़लीफ़ / कष्ट
  • विख्यात = प्रसिद्ध / मशहूर / जाना-माना
  • आरज़ू = इच्छा / कामना / अभिलाषा
  • गर्दिश = संकट के दिन / बुरा समय / चक्र
  • सत्साहस = सच्चा साहस / उत्तम हिम्मत / अटूट हौसला

📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत ओजस्वी, स्वाभिमानी और कड़े संकल्पों से ओत-प्रोत कविता के माध्यम से कवि ने मानव जीवन में आने वाली बाधाओं को हौसले की कसौटी बताया है और निरंतर प्रयास करने वाले कर्मवीरों की जीत का उद्घोष किया है। कवि कहते हैं कि यदि जीवन के इस मार्ग पर कठिन मुश्किलें और चुनौतियाँ न होतीं, तो इंसान के भीतर उन्हें जीतने के फौलादी इरादे कभी पैदा ही नहीं होते। जब मनुष्य बड़ी बाधाओं का सामना करने के लिए निकलता है, तभी समाज और जीवन के बड़े नियम (कायदे) बनते हैं। कवि युवाओं को प्रेरित करते हुए कहते हैं कि तू अपने पंख फैलाकर उस दिशा में उड़ चल जहाँ तेरी मंज़िल है। याद रख, यदि इस जीवन रूपी कठिन नदी (दरिया) को पार करने की चुनौती इंसानों के सामने न होती, तो किसी ने भी अपनी मेहनत से लकड़ी (काठ) की नौकाएँ नहीं गढ़ी होतीं। बाधाएँ ही नए आविष्कारों और हौसलों को जन्म देती हैं। यदि मनुष्य इन संघर्षों के काँटों पर मुस्कुराकर चलना सीख ले, तो जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और हर बीमारी (मर्ज़) की अचूक दवा मिल जाती है। इतिहास गवाह है कि इस संसार में सफलता के इस आग के दरिया को अनगिनत वीरों ने पार किया है; यहाँ किसी एक का नाम नहीं लिया जा सकता, बल्कि ऐसे महान कर्मवीरों की एक लंबी कतार खड़ी है।
कवि हमारी सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि हमारी सफलता की नींव बहुत मज़बूत है क्योंकि हमारे भीतर ज्ञान और उन्नति की एक सच्ची प्यास है। हमने पूरी दुनिया को हमेशा शांति (अमन) और भाईचारे का पावन पाठ पढ़ाया है, इसी कारण हमारा देश पूरे विश्व में प्रसिद्ध (विख्यात) है। तू अपनी निराशा को त्यागकर ज़रा होश में चारों तरफ नज़र उठा कर देख; इस संसार में जिस भी इंसान ने सच्चे मन से जो भी लक्ष्य चाहा है, कड़े पुरुषार्थ के बल पर उसे वह हर हाल में प्राप्त हुआ है। इसलिए तू रुक मत, बस आगे की ओर निकल चल और कुछ बड़ा करके गुज़र। तेरी सोच का दायरा उन चमकते हुए सितारों के पार होना चाहिए। अपनी इच्छा और संकल्प (आरज़ू) को इतना विशाल और गहरा बना ले कि उसमें दुखों का पूरा समंदर समा जाए। यदि आज जीवन में बुरा समय या संकट के दिन (गर्दिश) चल रहे हैं, तो भी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि सफलता इसी कठिन रास्ते पर मिलेगी; बस ज़रूरत है कि तू स्वयं पर विश्वास रखकर अपने अंतर्मन पर एक पैनी नज़र डाले।
कवि एक महान उदाहरण देते हुए कहते हैं कि किसी भी मज़बूत ज़ंजीर की असली ताक़त उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी को मज़बूत करने में होती है। तू ज़रा ध्यान से देख, तेरी मंज़िल भी तेरा स्वागत करने के लिए बेताब खड़ी है। एक कोरे कागज़ और अपनी लेखनी (कलम) की ताकत से सुनहरे अक्षरों में नया इतिहास रचने के लिए स्वयं समय का पहिया भी थमा हुआ खड़ा है। यदि तू जीवन में हर चुनौती से डर-डर कर जियेगा, तो जीवित रहते हुए भी रोज़ एक मानसिक मौत मरेगा। इसके विपरीत, यदि तू अपने सच्चे साहस (सत्साहस) को जगाकर हालातों से कड़ा संघर्ष करेगा, तो तू अवश्य सफल हो जाएगा। बैठ कर केवल व्यर्थ की चिंता करने और अपनी किस्मत को कोसने से जीवन में कभी कुछ हासिल नहीं होता। जिस क्षण से तू उठकर कर्म की एक नई शुरुआत कर देगा, उसी दिन तू अपनी सफलता को खुद से महज़ एक कदम दूर खड़ा पाएगा। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि आलस्य, भय और हीनभावना का पूरी तरह त्याग करके, अपने भीतर की असीम ऊर्जा और अटूट साहस के बल पर लगातार कर्म के पथ पर आगे बढ़ते रहना ही मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म है 

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