कलम


कलम
1. इस कलम से अनजान हो तुम,
इसकी ताकत से नादान हो तुम।
थोड़े में समझ लो तुम,
एक कलम की दास्तान हो तुम।
सदा सत्य की भाषा बोले,
सबके दिल का भाव टटोले।
2. लिखी सभी इतिहास इसी से,
दिनकर भी राष्ट्रकवि इसी से।
गाँधी की पहचान यही,
सुभाष की जान यही।
रविन्द्र की नोबेल इसी से,
भगत की फांसी इसी से。
3. बिना बोले कैसे सब कह जाये,
न जाने कैसे समझ आवे।
तोतली न भाषा इसकी,
न वेदों के उच्चारण जैसी।
सीधा न सरल पानी जैसा,
न पर्वत के रस्ते जैसा।
4. जो भी इसके रस को जाने,
वह तो इसकी महिमा माने।
सादी इसकी सुंदर बानी,
जैसे कोई अमर कहानी।
बिना कहे सब लिखती जाती,
सच्ची राह सबको दिखलाती।
5. छोटे बच्चे इसे चलाते,
लिख-लिख कर अपनी बात बताते।
ज्ञानी जन भी शीश झुकाते,
इसके बल पर जग को जगाते।
सीधी-सादी इसकी रीती,
जैसे कोई मीठी गीती।
6. यह जगत पे भारी है,
इसलिए सबकी प्यारी है।
तोड़ने से यह टूट ही जाता,
ये सबके दिलों को जोड़ता जाता।
भावों से जब कोई ऊपर आये,
सब कुछ सहज समझ ही जाये।

काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
  • दास्तान = कहानी / वृत्तांत / दास्ताँ
  • टटोले = परखना / खोजना / दिल की बात जानना
  • राष्ट्रकवि = पूरे देश का महान कवि (जैसे रामधारी सिंह दिनकर)
  • उच्चारण = बोलने का तरीका / ध्वनि प्रकट करना
  • बानी = आवाज़ / वाणी / बोल
  • ज्ञानी जन = बुद्धिमान लोग / विद्वान

📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत ओजस्वी, विचारणीय और मर्मस्पर्शी कविता के माध्यम से कवि ने संसार की सबसे बड़ी शक्ति यानी 'कलम' की महिमा, उसके गौरवशाली इतिहास और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर बहुत ही सुंदर प्रकाश डाला है। कवि कहते हैं कि आम इंसान अक्सर इस छोटी सी दिखने वाली कलम की वास्तविक ताकत से अनजान और नादान रहता है। यदि हम इसे संक्षेप (थोड़े) में समझना चाहें, तो मानव सभ्यता और विचारों की पूरी कहानी (दास्तान) इसी कलम के दम पर टिकी हुई है। कलम कभी किसी से झूठ नहीं बोलती; यह हमेशा परम सत्य की भाषा बोलती है और समाज के हर व्यक्ति के अंतर्मन के भावों को गहराई से टटोलने का मादा रखती है। दुनिया का समूचा इतिहास इसी कलम के द्वारा लिखा गया है। रामधारी सिंह दिनकर जैसी ओजस्वी वाणी इसी कलम के कारण 'राष्ट्रकवि' बनी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सत्य के साथ पहचान और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का फौलादी संकल्प इसी कलम के विचारों से जिंदा हुआ। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को मिला नोबेल पुरस्कार इसी की देन है, और महान शहीद भगत सिंह ने हँसते-हँसते जो फांसी के फंदे को चूमा, उसके पीछे भी कलम की लिखी हुई वैचारिक क्रांति ही थी।
कलम की अपनी एक अनूठी और जादुई विशेषता है; यह बिना एक शब्द बोले भी इंसानी जज़बातों की पूरी दास्ताँ बयां कर देती है। इसकी अपनी कोई तोतली भाषा नहीं होती और न ही यह वेदों के कठिन और गूढ़ उच्चारण जैसी क्लिष्ट होती है। यह पानी की तरह बिल्कुल सीधी, साफ़ और सरल है, जिसमें कोई छल-कपट नहीं होता; और न ही यह पहाड़ों के घुमावدار और संकरे रास्तों की तरह उलझाने वाली होती है। जो भी मनुष्य इस कलम के महत्व और इसके रस को समझ लेता है, वह इसकी महिमा के आगे नतमस्तक हो जाता है। इसकी सादी और मधुर वाणी किसी अमर कहानी की तरह पवित्र होती है, जो चुपचाप बिना शोर मचाए समाज को उन्नति का सच्चा मार्ग दिखाती है। घर के नन्हें बच्चे भी अपनी नन्ही उँगलियों से इस कलम को पकड़कर वर्णमाला सीखते हैं और अपनी मासूम बातें कागज़ पर उतारते हैं। बड़े-बड़े बुद्धिमान और विद्वान (ज्ञानी जन) लोग भी इस कलम के विचारों के आगे शीश झुकाते हैं, क्योंकि इसी के विचारों के बल पर वे सोए हुए समाज को जगाने का पावन कार्य करते हैं। इसकी रीती-नीति बिल्कुल निश्छल और किसी मीठे गीत की तरह मधुर होती है।
यह कलम अपने भौतिक स्वरूप में लकड़ी या प्लास्टिक की बनी होने के कारण आसानी से टूट तो सकती है, लेकिन इसके द्वारा लिखे गए विचार अमर होते हैं जो सदियों तक लोगों के दिलों को आपस में जोड़ने का पावन कार्य करते हैं। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि जब मनुष्य अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर सादगी और सत्य के भावों को अपनाता है, तो उसे इस जीवन और जगत की असली सार्थकता बहुत ही सहजता से समझ आ जाती है। कलम की इस पावन मशाल को हमेशा पवित्र और आज़ाद रखना ही समाज का सबसे बड़ा धर्म है 


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