हमारे प्रिय नेता जी
शुरू हो गयी दौरा नेता जी आये हैं अब गाँव में,
लिख गए समस्या ले गए नम्बर तो अपने धाम में।
जाने न लोग जो नीति बतियाते हैं उनसे राजनीति में,
होती है अब सौदाबाज़ी लोगों से गाँव के मझार में।
लिख गए समस्या ले गए नम्बर तो अपने धाम में।
जाने न लोग जो नीति बतियाते हैं उनसे राजनीति में,
होती है अब सौदाबाज़ी लोगों से गाँव के मझार में।
सुनते हैं वो उसी का जो रहते हैं उनके बायें हाथ में,
अब उन्हें फ़ुर्सत कहाँ वो लगे हैं पैसों के विकास में।
गए जो उनके पास हम कुछ हुआ बात तो आ गये अपने शान में,
देश का पैसा देश के लिए हम गाते हैं केवल मचान में।
अब उन्हें फ़ुर्सत कहाँ वो लगे हैं पैसों के विकास में।
गए जो उनके पास हम कुछ हुआ बात तो आ गये अपने शान में,
देश का पैसा देश के लिए हम गाते हैं केवल मचान में।
मीठी है उनकी बात क्योंकि खाते हैं मीठा पान अम्बानी के दुकान में,
नज़र न मिलाते हमसे वो है जो गरीबी हमारे पास में।
राजा का ना प्रतिनिधि करते दिये हैं जो वोट लगे हैं उन्ही के विकास में,
अपनी सेवा पहले करते भूखे मरे या जाये जनता भाड़ में।
नज़र न मिलाते हमसे वो है जो गरीबी हमारे पास में।
राजा का ना प्रतिनिधि करते दिये हैं जो वोट लगे हैं उन्ही के विकास में,
अपनी सेवा पहले करते भूखे मरे या जाये जनता भाड़ में।
आज जो मिली सीट छोड़ फ़िकर सीट बचाना है अगले चुनाव में,
अगले चुनाव को देखकर वो काम करते पैसा जुटाते जनता के आड़ में।
अगले चुनाव को देखकर वो काम करते पैसा जुटाते जनता के आड़ में।
काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
- दौरा = चुनावी भ्रमण / क्षेत्र का चक्कर लगाना
- मझार = बीच में / मंझधार / राजनीति का चक्रव्यूह
- मचान = ऊँचा स्थान / मंच / दिखावे का ढांचा
- आड़ में = ओट में / बहाने से / छिपाकर
- फ़िकर = चिंता / परवाह
- प्रतिनिधि = जनता की आवाज़ उठाने वाला / नुमाइंदा
Bahut badiya
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