फूल खिले डाली
1. फूल खिले डाली,
उसको हाथ लगाये माली।
जो फूलों की सेवा करता,
लोग कहते उसको बनमाली।
उसको हाथ लगाये माली।
जो फूलों की सेवा करता,
लोग कहते उसको बनमाली।
2. रंग-बिरंगी फूल खिले,
उसमें एक फूल है काली।
बागों में है फूल खिले,
कोयल गीत गाये डाली।
उसमें एक फूल है काली।
बागों में है फूल खिले,
कोयल गीत गाये डाली।
3. फूलों से सब पूजा करते,
संग में जाये हमारी नानी।
जूही चम्पा गेंदा बेला,
और एक फूल है लीली।
संग में जाये हमारी नानी।
जूही चम्पा गेंदा बेला,
और एक फूल है लीली।
4. फूलों से सुंदर नहीं कुछ,
तू बात मान ले मम्मी भोली।
इस बात को जो न माने,
उसको सच में हम देंगे ताली।
तू बात मान ले मम्मी भोली।
इस बात को जो न माने,
उसको सच में हम देंगे ताली।
5. तितली आती दौड़-दौड़ कर,
भँवरा करता है रखवाली।
महक उठी है सारी बगिया,
खुश होती है इशी भोली।
भँवरा करता है रखवाली।
महक उठी है सारी बगिया,
खुश होती है इशी भोली।
6. सुबह-सुबह जब सूरज निकले,
खिल जाती है हर एक कली।
हँसकर जीना हमें सिखाती,
फूलों की यह सुंदर टोली।
फूल खिले डाली,
उसको हाथ लगाये माली।
खिल जाती है हर एक कली।
हँसकर जीना हमें सिखाती,
फूलों की यह सुंदर टोली।
फूल खिले डाली,
उसको हाथ लगाये माली।
काव्य में आए शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
- बनमाली = बाग़-बगीचों की देखभाल करने वाला / माली
- रंग-बिरंगी = कई सुंदर रंगों वाले
- चम्पा/लीली = सुगंधित और सुंदर फूलों के नाम
- बगिया = छोटा बगीचा / उपवन
- रखवाली = सुरक्षा करना / देखभाल करना
- टोली = समूह / झुंड
📜 इस कविता का विस्तृत भावार्थ और मुख्य संदेश:
इस अत्यंत मधुर और निश्छल बाल-कविता के माध्यम से कवि ने प्रकृति के सबसे सुंदर उपहार यानी डालियों पर मुस्कुराते हुए 'फूलों' और बगीचे के सादे सौंदर्य का बहुत ही मनमोहक वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि जब डालियों पर सुंदर फूल खिलते हैं, तो बाग़ का माली बड़े प्यार से उन्हें सहलाता है और उनकी सेवा करता है, जिसके कारण सब उसे आदर से 'बनमाली' कहते हैं। बगीचे में चारों तरफ रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले हुए हैं, जिनमें कुछ गहरे रंग के अनूठे फूल भी शामिल हैं। इस पावन माहौल में कोयल भी डालियों पर बैठकर मीठे स्वर में गीत गाती है। भारतीय संस्कृति में फूलों का स्थान बहुत पावन है; नानी सुबह-सुबह जूही, चम्पा, गेंदा, बेला और लीली जैसे पावन फूलों को चुनकर ईश्वर की पूजा-अर्थना के लिए ले जाती हैं।
इस अत्यंत मधुर और निश्छल बाल-कविता के माध्यम से कवि ने प्रकृति के सबसे सुंदर उपहार यानी डालियों पर मुस्कुराते हुए 'फूलों' और बगीचे के सादे सौंदर्य का बहुत ही मनमोहक वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि जब डालियों पर सुंदर फूल खिलते हैं, तो बाग़ का माली बड़े प्यार से उन्हें सहलाता है और उनकी सेवा करता है, जिसके कारण सब उसे आदर से 'बनमाली' कहते हैं। बगीचे में चारों तरफ रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले हुए हैं, जिनमें कुछ गहरे रंग के अनूठे फूल भी शामिल हैं। इस पावन माहौल में कोयल भी डालियों पर बैठकर मीठे स्वर में गीत गाती है। भारतीय संस्कृति में फूलों का स्थान बहुत पावन है; नानी सुबह-सुबह जूही, चम्पा, गेंदा, बेला और लीली जैसे पावन फूलों को चुनकर ईश्वर की पूजा-अर्थना के लिए ले जाती हैं।
कवि अपनी भोली मम्मी से प्यार से कहते हैं कि इस पूरी दुनिया में फूलों से सुंदर नहीं कुछ, तू यह बात मान ले। जो भी इंसान कुदरत के इस अद्भुत सच को स्वीकार करता है, हम सब खुश होकर उसके लिए ज़बरदस्त ताली बजाते हैं। जब फूलों की खुशबू से सारी बगिया महक उठती है, तो रंग-बिरंगी तितलियाँ और काले भँवरे भी दौड़-दौड़ कर फूलों के पास आते हैं और उनकी रखवाली करते हैं। इस सुंदर नज़ारे को देखकर घर की नन्हीं और भोली 'इशी' भी खुशी से झूम उठती है। सुबह सूरज की पहली किरण पड़ते ही जब हर एक कली मुस्कुराकर खिल जाती है, तो फूलों का यह सुंदर समूह हमें जीवन का सबसे बड़ा संदेश देता है। इस रचना का मुख्य संदेश यही है कि आधुनिक युग की मशीनी चकाचौंध से दूर, हमें बच्चों को प्रकृति के इस सादे रूप से जोड़ना चाहिए। जैसे फूल हर हाल में मुस्कुराते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी अपने सारे दुःख-दर्द भूलकर समाज में हमेशा प्यार, मिठास और खुशियाँ बिखेरते रहना चाहिए
जिसको जो भी हो पूछ सकता है
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